प्रशासनिक अनदेखी की हद: कलेक्टर को बताने के बाद भी कार्रवाई नहीं; डायलिसिस मरीज मजबूरन 70 किमी दूर इलाज कराने को विवश
संवाददाता : विकास शर्मा की रिपोर्ट/खबर धमाका न्यूज
जांजगीर डायलिसिस संकट: RO प्लांट खराब, सीट फुल, मरीज अपूर्व शर्मा ने पूछा- ‘हमारी जान कौन बचाएगा?’
प्रशासनिक अनदेखी की हद: कलेक्टर को बताने के बाद भी कार्रवाई नहीं; डायलिसिस मरीज मजबूरन 70 किमी दूर इलाज कराने को विवश

“इलाज के अभाव में गरीब मरीज मरने को मजबूर”: जांजगीर जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में गंभीर अनियमितता, मामला PMO और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुँचा
जांजगीर-चांपा,
छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिला अस्पताल में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम (PMNDP) की सुविधाओं में घोर प्रशासनिक अनियमितताओं, कर्मचारियों के दुराचार और आवश्यक उपकरणों की कमी के कारण सैकड़ों किडनी रोगियों का जीवन खतरे में पड़ गया है। स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता से निराश होकर, यह गंभीर मामला अब माननीय प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को भेज दिया गया है।

मरीज अपूर्व शर्मा का दर्द: “हमारी जान कौन बचाएगा?”
बलौदा निवासी और डायलिसिस पर निर्भर मरीज श्री अपूर्व शर्मा (पिता: अशोक शर्मा) ने अपने बयान में जिला अस्पताल की दयनीय स्थिति को उजागर किया। उन्होंने कहा:
श्री अपूर्व शर्मा ने कहा, “अस्पताल में न तो HCV पॉजिटिव मरीजों के लिए पर्याप्त मशीनें हैं और न ही पानी शुद्ध करने वाला RO प्लांट ठीक से काम करता है। इन विफलताओं के ऊपर कर्मचारियों की अनियमितता मरीजों का जीना मुश्किल कर देती है। हमें मजबूरन 60-70 किलोमीटर दूर बिलासपुर जाना पड़ता है या निजी अस्पतालों में नगद पैसे देकर इलाज कराना पड़ता है। गरीब आदमी इस आर्थिक बोझ को कैसे सहन करेगा? हमने कलेक्टर को बताया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अगर हमें मुफ्त इलाज नहीं मिल सकता, तो हमारी जान कौन बचाएगा?”
सामाजिक कार्यकर्ता ने उठाई आवाज: विकास शर्मा का प्रयास सराहनीय
इस पूरे मामले को उजागर करने और उच्च अधिकारियों तक पहुँचाने में सामाजिक कार्यकर्ता श्री विकास शर्मा की भूमिका सराहनीय रही है। उन्होंने न केवल मरीजों के दर्द को सुना, बल्कि स्थानीय प्रशासन की विफलता के बावजूद, न्याय की लड़ाई को राष्ट्रीय स्तर तक ले गए हैं।
श्री विकास शर्मा ने कहा, “प्रधानमंत्री ने गरीबों के लिए यह सुविधा शुरू की, लेकिन स्थानीय कर्मचारियों और लापरवाह अधिकारियों ने इसे लूट का जरिया बना दिया है। हमने सभी स्थानीय प्रमुखों को लिखित में शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हमने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और PMO को भेजी गई अपील में स्पष्ट रूप से कर्मचारी अनियमितताओं की उच्च-स्तरीय जाँच और मरीजों को निजी इलाज पर हुए आर्थिक नुकसान की क्षतिपूर्ति (Reimbursement) की मांग की है। अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।”
मुख्य माँगे:
शिकायत में केंद्रीय अधिकारियों से निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है:
डायलिसिस यूनिट के कर्मचारियों की अनियमितताओं की तत्काल और कठोर जाँच।
RO प्लांट की स्थायी मरम्मत या नई व्यवस्था तथा अतिरिक्त HCV पॉजिटिव मशीनों की अविलंब आपूर्ति।
लापरवाही के कारण जिन मरीजों को निजी केंद्रों पर नगद भुगतान करना पड़ा है, उन्हें तत्काल क्षतिपूर्ति प्रदान की जाए।
यह उम्मीद की जाती है कि केंद्र सरकार इस गंभीर मानवीय संकट का संज्ञान लेगी और जांजगीर-चांपा जिले के किडनी रोगियों को जीवनदान प्रदान करेगी।




